जुआघरों (कसीनो) में लोग रुपयों की जगह चिप्स से क्यों खेलते हैं ?

ऐसा अक्सर हम लोग फिल्मों में देखते हैं और जो वास्तविकता में होता भी है। इसे काफी लोग मनोवैज्ञानिक तथ्य के हिसाब से देखते हैं और कुछ लोगों का कहना बिलकुल अलग ही है। कुछ लोग तो कसीनो को मानसिक थकान को उतारने की सबसे अच्छी जगह बताते हैं। अमूमन कसीनो वही लोग जाते हैं जिनकी जेबें भरी हुई होती हैं, कुछ लोग वहाँ पैसे कमाने आते हैं तो कुछ लोग सिर्फ पैसे हारने के लिए ही आते हैं। 


जैसा कि हमने देखा है कि पैसे लगाने वाला व्यक्ति कॅश काउंटर पर जाता है, जहाँ लोग एक काउंटर पर पैसे देकर कुछ चिप्स ले लेते हैं और फिर उन्हीं से खेलते रहते हैं। ये चिप्स बेहद खास होते हैं इनमें RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) वाले चिप्स लगे होते हैं। जो अगर चोरी भी हो जाए तो किसी काम के नहीं रहते हैं। 


अगर सुबिधा के लिहाज से देखा जाए तो नोट आकर में काफी बड़े होते हैं और उनको टेबल पर रखने से ज्यादा जगह जायेगी। जिससे जब कोई व्यक्ति चाल चलेगा तो उसे काफी मसक्कत करनी पड़ेगी। तो इन सभी झंझटों से छुटकारा पाने के लिए भी कसीनो में चिप्स का इस्तेमाल किया जाता है।


और अंतिम बात ये कि अगर किसी को 20000 रुपये जुएं में लगाने हो तो उसे 100 की 2 या फिर 200 की 1 गड्डी टेबल पर रखनी होगी। और पैसे लगाने पर ये रकम देखने से बहुत ज्यादा लगेगी।  और अगर इतनी रकम अगर सिक्कों में होगी तो लोगों को इसका अंदाजा नहीं होगा और लोग जुएं में पैसे लगाते रहेंगे और जिससे कसीनो को फायदा होता रहेगा।
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