हमारी पुरानी यादें


hotgf.cf

शैतानी, नादानी, मासूमियत, सच्चाई और बचपना, खुश रहने की परफेक्ट उम्र और वो समय जिसे हर कोई फिर से दोबारा जीना चाहता है। हर कोई चाहता है कि जिंदगी में वो दिन फिर से आये।  जब माँ-पापा हमें प्यार से जगाते थे, तैयार करते थे, अपने हाथों से खाना खिलाते थे।
हम फिर से अपनी पीठ पर वही किताबों का दो चटकनी वाला वस्ता और लंच के लिए वही दो खाने वाला टिफ़िन और पानी की बोतल को साथ लेकर अपनी जिंदगी के सबसे हसीन पलों, उन यादों और अपने उन्हीं दोस्तों के साथ अपने विद्या के उसी पवित्र मंदिर में फिर से जाना चाहता है। हम फिर से वही, अपने नन्हें -नन्हें हाथों को जोड़कर विद्या के उसी मंदिर में खड़े होकर, शिक्षा की उस पवित्र देवी की पूजा करना चाहते हैं।
हम चाहते हैं कि वही मैथ्स वाले टीचर फिर से आ जाएँ, फिर से हमें पढ़ाएं और होम वर्क करके न ले जाने पर  फिर से डांट लगाएं फिर से क्लास के बाहर निकालें और हम बाहर आकर खुद को फ्री महसूस कराएं और मन  ही मन खूब मुस्कुराएं। शायद इसीलिए वो यादें आज भी हमारा पीछा नहीं छोड़ती हैं और आज भी हमारा पीछा नहीं छोड़ती हैं और आज भी हम आगे बढ़ने के लिए वही अप्लाई करते हैं, जब टीचर कहते थे कि जो काम सबसे पहले और सबसे सफाई  से करेगा, वह सबसे ज्यादा स्टार पायेगा।
हिंदी वाले सर की वो बातें अभी भी याद हैं हमें, जब क्लास में हम लोगों के शोर मचाने पर, डाटने वजह महान वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डाक्टरों, अफसरों और किसानों की कहानियां सुनाया करते थे।
वो बचपन हमें फिर से चाहिए, वो दोस्त हमें फिर से चाहिए। हम फिर से सुबह जल्दी उठना चाहते हैं और किताबों का अपना वही पुराना दो चटकनी वाला वस्ता फिर से ले जाना चाहते हैं

खुद को महान बनाने के लिए हम, फिर से सच बोलना चाहते हैं
हम स्कूल जाना चाहते हैं, हम फिर से पढ़ना चाहते हैं। 
Previous Post
Next Post
Related Posts